नौरात्र पर माँ को समर्पित मेरी छोटी रचना:फणीन्द्र कुमार मिश्र

ममतामयी महामाई हैं,मृदुल-मृदुल मन का मंजर 
 मन के भाव मनोहर करती ,मायारूपी बजा मृदंग
  मनहारी ममता की सागर, मनवांछित फल देती हैं 
  मनोयोग से मंशा जाने ,मन-भर मन कर देती हैं 
  माता ममता की हैं सागर ,मिश्रा ये समझाता है 
  कुन्ठित मन को करे जो मुद्रित ,सुख चैन वही तो पाता है।

Popular posts from this blog

इंसान परेशान बहुत है

लिख रहा हूं परिणाम

सेंट जोसेफ स्कूल में दिवाली पर सजी रंगोली: क्लास 9A की छात्राओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा