ढाल


# रचनाकार श्वेता पांडे#
खा चुका जब ठोकरें ,
फिर क्यों पड़ा है सोच में ।
गिर के उठना और भी बड़ा है , 
मत पड़ो किसी मोच में ।
याद रख जो लड़ गया है,
ढाल बस वह बन गया है।।

उठ ना सका तो जान ले तू
आज बस यह मान ले तू
छोड़ जाएंगे सब पदचिन्ह अपने
तू रह खड़ा देखेगा सपने
फूलों भरी बगिया में तू ,
बस एक शूल सा रह जाएगा ।
सबको चुभता ,मन मसोसता ,
 रोएगा फिर पछताएगा|
अभी समय है कर दिखा जा,
आंधियों को भी हरा जा ।
आंधियां आती रहेगी,
यूं तुझको सताती रहेंगी।
याद रख जो लड़ गया है,
ढाल बस वह बन गया है।
 -श्वेता पांडेय
 कक्षा11 A
 सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिसवा बाजार 
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