सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त समाज


#आस्था गुप्ता कक्षा 12 B सेंट जोसेफ स्कूल सिसवा बाजार
भारत एक ऐसा देश है जहाँ महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है। हालाँकि, उन्हें जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, वे इस अवधारणा के विपरीत हैं। दूसरी ओर वे उन्हें देवी के रूप में पूजते हैं और दूसरी ओर वे उन्हें अपशब्द कहते हैं और उन्हें हीन समझते हैं। भारत की महिलाओं को हमेशा समाज में कुछ समस्या  का सामना करना पड़ता था और आज तक करना ही पड़ रहा है|नारी उस वृक्ष की भांति है जो विषम परिस्थितियों में भी तटस्थ रहते हुए राहगीरों को छाया प्रदान करता है, नारी की कोमलता एवं सहनशिलता को कई बार पुरुष ने उसकी निर्बलता मान लिया और इसलिए उसे अबला कहा किन्तु वो अबला नहीं है वो तो सबला है, पुरुष वर्ग शायद ये नहीं जानते की उसकी इसी कोमलता एवं सहनशीलता में ही मानव जीवन का अस्तित्व संभव है, क्या माँ के सिवाय संसार में ऐसी कोई हस्ती है जो उसी वात्सल्य और प्रेम से शिशु का लानन-पालन कर सके जैसे की माँ करती है, संसार में चेतना के अविर्भाव का श्रेय नारी को ही जाता है, इस में किंचित मात्रा भी संदेह नहीं है कि नारी ही वो शक्ति है जो समाज का पोषण से लेकर संवर्धन तक करती है

➡️भारत में महिलाओं की समस्याए 

जब शुरुआती दिनों में, सती प्रथा , कोई विधवा पुनर्विवाह, देवदासी प्रणाली और अधिक जैसे गंभीर मुद्दे थे। हालांकि उनमें से अधिकांश अब प्रचलित नहीं हैं, फिर भी नए मुद्दे हैं जो महिलाओं का  सामना करते हैं।  वे एक देश के विकास में बाधा डालते हैं और महिलाओं को हीन महसूस करते हैं।

सबसे पहले, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, भारत में महिलाओं द्वारा सामना किया जाने वाला एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। यह लगभग हर दिन विभिन्न रूपों में हो रहा है। लोग कुछ करने के बजाय उस पर आंखें मूंद लेते हैं। घरेलू हिंसा आपके विचार से अधिक बार होती है। इसके अलावा, दहेज-संबंधी उत्पीड़न, वैवाहिक बलात्कार और बहुत कुछ है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर नहीं माना जाता है। वे लगभग हर जगह भेदभाव का सामना करते हैं, चाहे कार्यस्थल पर या घर पर। यहां तक ​​कि छोटी लड़कियां भी इस भेदभाव का शिकार हो जाती हैं। 

इसके अलावा, महिला शिक्षा और लिंग वेतन अंतर में भी कमी है।   वे कार्यस्थल उत्पीड़न और शोषण का भी सामना करते हैं|पूरे विश्व में 8 मार्च का दिन महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। नारी का धरती पर सबसे सम्मानीय रूप है माँ का, माँ जिसे ईशवर से भी बढ़कर माना जाता है तो माँ का सम्मान को कम नहीं होने देना चाहिए। माना आज की संतान अपने मां को इतना महत्व नहीं देती जो कि गलत है।
 
➡️इन मुद्दों से निपटने के तरीके
 
भारत में महिलाओं द्वारा सामना किए गए इन मुद्दों से लड़ने के लिए हम सभी को एक साथ आना चाहिए। प्रत्येक नागरिक और सरकार को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित जगह बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ़  अधिक से अधिक  कठोर कानून बनाने चाहिए। सभी को गंभीरता से लेने के लिए उन्हें सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, अवसर पुरुषों और महिलाओं के लिए समान रूप से प्रदान किए जाने चाहिए। हर क्षेत्र में, हमें महिलाओं को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह चिकित्सा क्षेत्र या खेल क्षेत्र है, अवसरों को बराबर होना चाहिए|

इसके अलावा, शिक्षा पर गंभीरता से जोर दिया जाना चाहिए। हर लड़की और महिला को बेहतर भविष्य के लिए शिक्षित करना एक मजबूरी बना दिया जाना चाहिए। हमें भारत में अपनी महिलाओं की सुरक्षा और सुरक्षा के लिए हाथ मिलाना चाहिए। यह हमें एक देश के रूप में पनपने और दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में मदद करेगा।
इसलिए, हम में से हर एक को समान समकक्षों के रूप में महिलाओं के साथ व्यवहार करने के लिए तैयार होना चाहिए। हमें उन्हें हर स्तर पर मदद करनी चाहिए और इससे अधिक उन्हें अपने निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना चाहिए। उसके बाद, इन मुद्दों को समाप्त किया जा सकता है ताकि महिलाओं को लिंग के नाम पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।

➡️प्रेरणादायक स्रोत

इंदिरा गाँधी, कल्पना चावला, सरोजिनी नायडू जैसी महान शख़्सियत ने अपने आपको अपने क्षेत्र में ना केवल साबित किया, बल्कि लोगो के लिए वे प्रेरणादायक स्रोत भी बनी।


➡️नारी सशक्तिकरण से जुड़े कानून और अधिकार


महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनैतिक आज़ादी देने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में महिलाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानून पारित किए गए हैं,

जो महिलाओं को पूर्ण अधिकार प्रदान करते हैं। जैसे:- घरेलू हिंसा एक्ट 2005 के तहत महिलाएं अपने साथ हो रहे शारीरिक, मानसिक शोषण के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं।

इसके अलावा हिन्दू अधिनियम 1995 के अनुसार, यदि कोई महिला अपने पति से परेशान है तो वह उससे तलाक ले सकती है। तो वहीं, उद्योग विवाद एक्ट की धारा 66 के अनुसार, कामकाजी महिलाओं को सुबह छह बजे से पहले और शाम सात बजे के बाद काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है और प्रसूति सुविधा अधिनियम 1961 के तहत महिलाएं प्रसव के तीन महीने बाद तक मेटरनिटी लीव पर वेतन पाने की अधिकारी हैं।

इसके अलावा अब तो पिता की सम्पत्ति में बेटी का भी उतना ही हक़ होगा जितना की बेटे का होता है। दूसरा बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं।

जहां ऐसे किसी भी मामले को सुनवाई महिला जज द्वारा की जाएगी।  साथ ही किसी भी तरह की न्यायिक पूछताछ के लिए महिला को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद पुलिस स्टेशन में नहीं रोका जा सकता है।  

बच्चियों और लड़कियों को छेड़खानी से बचाने के लिए छेड़खानी करने वाले व्यक्ति का अपराध संगीन अपराधों की श्रेणी में रखा गया है। साथ ही दहेज के लिए प्रताड़ना भी एक प्रकार का कानूनी अपराध है।

इस प्रकार उपरोक्त कानूनों का सहारा लेकर महिलाएं स्वयं को मजबूत कर सकती हैं। तथा आज के इस समाज में स्वतन्त्रतापूर्व जीवन जी सकती है.

➡️उपसंहार

 “माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती कि चाहे कितनी भी पूजा कर लो, या फिर 9 दिन अखंड उपवास कर लो, लेकिन अगर नारी कि इज्जतकरना नहीं सिखा तो सब बेकार है।”
 
इस प्रकार नारी आरंभ से ही अनंत गुणों की भंडार रही है। नारी हृदय में पृथ्वी जैसी क्षमता, सूर्य जैसा तेज, समुन्द्र जैसी गंभीरता, चंद्रमा जैसी शीतलता और पर्वत जैसी मानसिक उच्चता देखने को मिलती है।

वह दया, करुणा, ममता और प्रेम की पवित्र मूर्त है और समय आने पर चंडी का रूप धारण करके भी दुष्टों का नाश करती है। इसलिए आज 21वीं सदी के इस युग में नारी को किसी भी परिस्थिति में कमजोर 

By -Astha gupta 
Class-12 (B) 
S.t Joseph's senior secondary school
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