जीवन की सच्चाई
# रचनाकार प्रेम सागर चौबे
बचना, चलना चलकर थकना
जीवन की यही कहानी है।
पथ पर चलकर झंझावातों से
न मिलना बेमानी है
ए पथ के राही सोच न तू
चलता जा इस रवानी से
देकर लेकर पाकर, खोकर,
मिलते-जुलते सब रहते हैं
समय -चक्र सब जान-समझकर
हम सभी इसी में रहते हैं।
#प्रेम सागर चौबे तहसील प्रभारी निचलौल STATE NEWS INDIA
अध्यापक सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिसवा बाजार