प्रकृति का संकेत


##रचनाकार प्रेम सागर चौबे अध्यापक सेंट जोसफ स्कूल #

बारिस बारिस तुम कहते हो,
 ना आऊं तो मरते हो।
 आऊं तो चिल्ला- चिल्ला कर,
जाओ- जाओ कहते हो।
ए मानव तुम तो अबुझ अबुझ, 
क्या क्या स्वप्न सजोते हो।
प्रकृति संतुलन के मद में, 
तुझ सा अन्यायी नहीं देखा।
कभी  सोच बनाकर सोचो इसको, 
बिन इसके नही कोई नाता ।
तेरा मेरा कहकर मानव, 
तूने इसको तड़पाया है।
 इसीलिए तेरे उपर यह,
कहर बनकर छाया है।
अब देख ना समझ तू इसको,
बस मे तेरे अब कुछ भी नही,
अब भी सम्हलो, ताकि कुछ करके,
बचा सको इस मंजर को।
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