तू खुद को पहचान


#रचनाकार शशांक सिंह#
 कक्षा 12B सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिसवा बाजार

वो नन्हे से पाव जिन पर तु कभी चलता था

तू कभी गिरे नही इसलिए तेरा बाप हर दिन उस कड़ी धुप मे जलता था

खुद बेचारी भुखी रही पर तु उस माँ के दुध से हर रोज पलता था।

ये कहानी है उस सुरज की जो कभी न धलता था।

तु आज जिन रास्तो पर चल रहा है क्यो है उन से अनजान

ये जीन्दगी आज है कल नही इसलिए इसी घड़ी तु खुद को पहचान

सुना था मुर्दे बोलते नही पर आज उस आइने ने कहा मुझसे सायद तु सही नही है जरा देख अपने अन्दर छाक कर गला घोट रहा है अपना किसमत कि उन जनजीरो मे बांधकर 

अरे किसमत को गुलाम बना सकता है तु मेहनत से बांधकर 

क्यु बैठ चुका है तु यु हारकर ‌।

चल उठ कुछ बड़ा कर बस एक कदम हिम्मत का बड़ा सब होगा आसान

मेरे दोस्त है तु एक जीन्दा दिल इंसान 
आज और इसी घड़ी खुद को पहचान

जिस मन्जील पर तु पहुचना चाहता है मै भी उन्ही रास्तो का मुसाफीर हुँ

चाहा था बहुत कुछ करना पर सबको आज भी लगता है की मै एक काफीर हु

मै तुझे भी यही कहुंगा और खुद से भी भुल जाओ उन आवाजो को जो तेरी नही है वो दर्द, वो गिला, वो सीख्वा कुछ भी तेरी नहीं है 

फर्क नही पड़ता तु चाहे हिन्दु हो या मुसलमान
हमेशा ये याद रख इस दुनिया के लिए तुं बस है एक मेहमान

एक दिन आएगा जब तुझे भी जाना पडेगा श्मशान

पर वो दिन आज नहीं है इसलिए मेरे भाई  तु आज तो खुद को पहचान

तेरे अन्दर एक लव जल रही है और ये तबतक जलती रहेगी जबतक तु चाहेगा इसे बुझने मत देना कभी

देखना तेरा ये दिल भी जल्द ही आग का दरीया बन जाएगा
ऐसी आग जिन्हें तेरे आसुवो का पानी भी नहीं बुझा पाएगा

तु बस चलना सुरू कर और खुद पर भरोसा रख देखना ज्ल्द ही तु सीर्फ दौड़ता जाएगा

ऐ दोस्त तु यु मुर्झाया मत कर ये आइना भी कह रहा है तुझसे सबसे प्यारी है तेरी मुसकान 

उठ खड़ा हो और देख खुद को 

ये है तेरी पहचान

ये है तेरी पहचान
शशांक सिंह कक्षा 12B सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिसवा बाजार
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