चान_जब_उगिहें अंगनवा


#रचनाकार कवि सम्राट आलोक शर्मा#
कइसे दीदार होई, घर ना सजनवा,
करवा के चान जब उगिहें अंगनवा !!
पिया परदेशी भइलें हिया लगाके,
भूल गईलें जाने कवने,
देसवा मे जाके !
जियरा उदास रही, खोजिहें नयनवा,
करवा के चान जब उगिहें अंगनवा !
नइहर से माई भेजली सासु समझावें सजअ जनि करअ देर बहुरा मानअ कहनवा, करवा के चान अब उगिहें अंगनवा !!
धानी चुनरिया,
जल्द बहुरिया !
केकरा से कहीं
अपने मनवा के बतिया, विरथा सिंगार सारी, चूड़ियां कंगनवा करवा के चान जब उगिहें अंगनवा !! करीलें निहोरा चान चलनी में आई कइसे
पिया के सुरतिया !
राखअ मोरा लाज हो,
बाड़अ परदेश बाकिर, अइबअ घरे आजु हो! संघरी में लेले अइहअ, हमरो सजनवा, करवा के चान जब अइहअ अंगनवा !! कइसे दीदार होई, घर ना सजनवा, करवा के....
आप सबके करवाचउथ के हार्दिक बधाई रचनाकार आलोक शर्मा महराजगंज
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