महापर्व छठ पूजा.
#शिखा गुप्ता
12 A
सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिसवा बाजार
दीपावली के पाच दिन के बाद छठे दिन एक नये त्योहार की शुरुआत होती है जिसे छठ पूजा के नाम से जानना जाता है। छठ पर्व, छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व मैथिल,मगध और भोजपुरी लोगो का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं। यह त्योहार चार दिनों तक चलता हैं।
*छठ पूजा क्या हैं ?*
सूर्य षष्ठी व्रत होने कि वजह से इसे छठ पूजा कहा गया है यह त्योहार चार दिन तक चलता है जोकि कठिन व्रतो में से एक है।
छठ पूजा सूर्य और उसकी बहन छठी मैया को समर्पित है इनकी वजह से ही आज पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है और वही छठी मैया बच्चो की रक्षा करने वाली देवी मानी जाती है इसी वजह से लोग छठ पर्व पर उनकी पूजा करते है।
*छठी मैया कौन है ?*
छठ पूजा भगवान सूर्य और पत्नी-बहन को अर्पित की जाती है। लेकिन यहां छठी मैया सूर्य देव की बहन है। पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है की प्रकुती देवी ने अपने आप को छह भागो में विभाजित किया था और इनके छठे भाग को षष्ठी देवी के नाम से जाना जाता है और वे ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चो की रक्षा करने वाली देवी है।
*शुरुआत....*
ऐतिहासिक रूप से, मुंगेर सीता मनपत्थर (सीता चरण) सीताचरण मंदिर के लिए जाना जाता है जो मुंगेर में गंगा के बीच में एक शिलाखंड पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि माता सीता ने मुंगेर में छठ पर्व मनाया था। इसके बाद ही छठ महापर्व की शुरुआत हुई। इसीलिए मुंगेर और बेगूसराय में छठ महापर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में रनबे (छठी मैया) अपनी पुत्री की आराधना की थी। तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था। इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी।
*छठ पर्व किस प्रकार मनाते हैं ?*
वैसे तो दीपावली के पांचवे दिन के बाद छठ पर्व की शुरुआत हो जाती है जो चार दिन तक चलती है और इन चार दिनों में गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। छठ पूजा सिर्फ महिला या सिर्फ पुरुष नहीं करते बल्कि दोनों करते है आईये जानते है कि छठ पूजा कैसे मनाई जाती है।
*पहला दिन 1:- नहाय खाय*
यह छठ पूजा का पहला दिन होता है इस दिन भक्त स्नान करने से पहले भोजन का सेवन नहीं करते हैं और नदी में स्नान करने बाद वे भोजन लेते है। इन सबके बाद अपने लिए मिट्टी के चुले पर सबके लिए खाना तैयार किया जाता है।
*दूसरा दिन 2:- खरना*
यह छठ पूजा का दूसरा दिन हौ और इस दिन लोग पूरे दिन उपवास रखते है और शाम को सूर्यदेव को गुड़ से बनी खीर और पूरियों का प्रसाद अर्पित किया जाता है और व्रत रखने वालों में बांटा जाता है।
*तीसरा दिन 3:- संध्या अर्घ्य*
छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे कठिन होता हैं – इसमें लोग और ज्यादातर महिलाएं – एक पूरे दिन उपवास करती हैं जहां वे न तो पानी का सेवन करते हैं और न ही भोजन का। इस दिन ढलते सूर्य को अर्घ्य की जाती है। इस दिन दान का भी बहुत महत्व होता है। छ्ठ के तीसरे दिन लड्डू का भी बहुत महत्व होता है।
*चौथा दिन 4:- उषा अर्घ्य*
यह छठ पूजा का चौथा दिन होता है जिसे उषा अर्घ्य कहते है इस दिन को भक्त उगते सूर्य को प्रार्थना अर्पित करने के बाद भक्त अपना लंबा उपवास तोड़ते हैं और सूर्य देव को अर्ध्य चढ़ाते है यह चार दिन तक ये छठ पर्व चलता है। लेकिन ये सबसे कठिन पर्व में से एक है।
उत्तर भारत में छठ पूजा विशेष रूप से दो राज्यों में मनाया जाता है। अपनी जन्मभूमि से दूर रहने वाले लोग भी जहाँ कहीं रहते हैं वही पर इस त्यौहार को मनाते हैं, इसलिए आजकल, यह विदेशों में भी मनाते देखा जा रहा है। छठ पूजा के लिए बिहार सबसे मशहूर है।
छठ माता लोगों को समृद्धि, धन, बच्चे, सभी कुछ का आशीर्वाद देती है। वह हमारी सभी इच्छाओं को पूरा करती है और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती है। लोगों का बहुत दृढ़ विश्वास है, इसीलिए हर साल वे इस अवसर को बहुत ईमानदारी से मनाते हैं। वह हमारे जीवन को आनंद और खुशी से भर देती है जो हम सभी को पसंद है।
जब लोग इस पूजा को करने के बाद दूसरों को खुश देखते हैं, तो वे अगले वर्ष से इस अवसर को मनाने की इच्छा रखते हैं और यह एक और मुख्य वजह है कि यह त्यौहार इन दिनों इतना ज्यादा लोकप्रिय होते जा रहा है।