मदनपुर देवी दर्शन नारायणी नदी पर चर्चा पनियहवाँ पुल पिता औ पुत्र #रचनाकार कवि सम्राट आलोक शर्मा जी#
बिहार,मदनपुर माई मंदिर,
दर्शन हमे करा दें!
बेटे की इच्छा थी,
जंगल-गंडक नदी दिखा दें!!
अच्छी इच्छा देख पुत्र की,
मैने तत्क्षण मान लिया!
पिता पुत्र फिर दोनो ने,
एकसाथ प्रस्थान किया!!
कुछ दूरी तय की पँहुच गए,
दोनों माँ के दरबार!
चढ़ा नारियल मत्था टेका,
श्रद्धा लिए अपार!!
यहीं मदनपुर माँ का मंदिर,
बीच घना जंगल हैं!
जो भी भक्त यहाँ आ जाये,
जीवन मे मंगल है!!
दर्शन की-जंगल देखा,
बात किये हम खुलकर!
गण्डक नदी देखने फिर,
पँहुचे पनियहवां पुलपर!!
पूछा बेटे ने कहाँ से उदगम,
कहाँ हुआ है अंत ?
क्या कहता इतिहास हमारा,
क्या कहते हैं ग्रन्थ?!
मैने कहा यही गण्डक हैं,
विगलित हिम की धार!
एक किनारे यूपी अपना,
दूजा-छोर...... बिहार!!
दोनों प्रान्त से प्रेम है इनका,
देखो मध्य के प्यार को!
बहुत दूर तक बांट रही हैं,
यूपी और बिहार को!!
कालीगण्डकी औ त्रिशूली,
निकली महा-हिमालय से!
संगम लेकर बनी नारायणी,
गुजरी कई देवालय से!!
पलमें मार्ग बदल लेतीं,
कुछ नहीं समझ में आता है!
कभी सटा,कभी तीनमील पर,
छोर नज़र आता है!!
हैं नेपाल की बड़ी नदी,
इनकी पौराणिक गाथा है!
वेद, पुराण सन्त जिनको,
नित गाता औ सुनाता है!!
शापमुक्त होने नारायण,
विष्णु इसी में आये थे!
पड़ा नारायणी नाम तभी से,
वेद पुराण भी गाये थे!!
काले ठाकुरजी,सालिकग्राम भी,
इसी नदी में रहते हैं!
शालिग्रामि भी नाम नदीका,
इसीलिए हम कहते हैं!!
यहीं आश्रम बाल्मीकि,
जँह सिया दुःखी गम्भीर!
लवकुश का भी जन्म हुआ था,
इसी नदी के तीर!!
गज की जान बचाने केशव,
इसी नदी में आए थे!
जरासंध का वधकर पांडव,
नदी यही नहाए थे!!
कालीगण्डक,सप्तगण्डकी,
इसे नेपालमें कहते हैं!
कहते नारायणी बड़ीगण्डक,
भारत में जो रहते हैं!!
कोंडोचेट्स, सदानीरा,
गण्डक भी नाम इसी का!
लेकिन जब ये क्रुद्ध हो जातीं,
सुनती नहीं किसी का!!
निबुन हिमल ग्लैशियर से निकली,
मुक्तिधाम से आईं हैं!
6268 मीटर धरती से,
उस चोटी की ऊंचाई है!!
धौलागिरि के मुसतांग जिला,
पटना तक बहती आई हैं!
तेरह सौ दस 1310 किमी,
इनकी कुल लम्बाई है!
960 किमी नेपाल,
350 भारत मे रहती हैं!
पर महराजगंज में बेटा,
15 किमी ही बहती हैं!!
फिर कुशीनगर जिला होते,
ये जा पँहुची चंपारण तक!
मुज्जफरपुर औ अन्य जगह,
छूते बिहार के सारण तक!!
सोनपुर, हाजीपुर में,
यह हर्षमग्न हो खिल जाती!
भारत भूमि को दे आशीष,
पटना गंगा में मिल जाती!!
पावन पुण्य पुनीता हैं ये,
ना कोई इनकी सानी है!
बेटे ने भी मान लिया,
क्या अद्भुत पुन्य कहानी है!!
इसे लिखने का उद्देश्य कुछ अच्छी जानकारी का प्रसार भी है🙏
रचनाकार_आलोक_शर्मा_महराजगंज