महाकुंभ के मेला

 Mahakumbh Mela,Astha aur Lok Kalyan



भक्ति के रंग में रंगल गाँव देखा,

धरम में, करम में, सनल गाँव देखा.

अगल में, बगल में सगल गाँव देखा,

महा कुंभ नहाये चलल गाँव देखा.


एहू हाथे झोरा, ओहू हाथे झोरा,

कान्ही पर बोरा, कपारे पर बोरा.

कमरी में केहू, कथरी में केहू,

रजाई में केहू, दुलाई में केहू.


आजी रँगावत रही गोड़ देखऽ,

हँसत हँउवे बब्बा, तनी जोड़ देखऽ.

घुंघटवे से पूछे पतोहिया कि, अईया,

गठरिया में अब का रखाई बतईहा.


एहर हउवे लुग्गा, ओहर हउवे पूड़ी,

रामायण का लग्गे ह मँड़ुआ के डूंढ़ी.

चाउर आ चिउरा किनारे के ओरी,

नयका चपलवा अचारे का ओरी.



(इस गठरी और इस व्यवस्था के साथ गाँव का आदमी जब गाँव के बाहर रेलवे स्टेशन पर आता है तब क्या स्थिति होती है ?)


मचल हउवे हल्ला, चढ़ावऽ उतारऽ,

खचाखच भरल रेलगाड़ी निहारऽ.

एहर गुर्री-गुर्रा, ओहर लुर्री‍-लुर्रा,

आ बीचे में हउव शराफत से बोलऽ


चपायल ह केहु, दबायल ह केहू,

घंटन से उपर टँगायल ह केहू.

केहू हक्का-बक्का, केहू लाल-पियर,

केहू फनफनात हउवे जीरा के नियर.


बप्पा रे बप्पा, आ दईया रे दईया,

तनी हम्मे आगे बढ़े देतऽ भईया.

मगर केहू दर से टसकले ना टसके,

टसकले ना टसके, मसकले ना मसके,


छिड़ल ह हिताई-मिताई के चरचा,

पढ़ाई-लिखाई-कमाई के चरचा.

दरोगा के बदली करावत हौ केहू,

लग्गी से पानी पियावत हौ केहू.




(इसी भीड़ में गाँव का एक नया जोड़ा, साल भर के अन्दरे के मामला है, वो भी आया हुआ है. उसकी गती से उसकी अवस्था की जानकारी हो जाती है बाकी आप आगे देखिये…)


गुलब्बन के दुलहिन चलै धीरे धीरे

भरल नाव जइसे नदी तीरे तीरे.

सजल देहि जइसे हो गवने के डोली,

हँसी हौ बताशा शहद हउवे बोली.


देखैली ठोकर बचावेली धक्का,

मने मन छोहारा, मने मन मुनक्का.

फुटेहरा नियरा मुस्किया मुस्किया के

निहारे ली मेला चिहा के चिहा के.


सबै देवी देवता मनावत चलेली,

नरियर प नरियर चढ़ावत चलेली.

किनारे से देखैं, इशारे से बोलैं

कहीं गाँठ जोड़ें कहीं गाँठ खोलैं.


बड़े मन से मन्दिर में दर्शन करेली

आ दुधै से शिवजी के अरघा भरेली.

चढ़ावें चढ़ावा आ कोठर शिवाला

छूवल चाहें पिण्डी लटक नाहीं जाला.


 महाकुंभ के मेला, महा कुंभ के मेला.

(ये पुरानी रचना है कमलेश गौतम की कुछ संशोधन के साथ)


पवित्र मां गंगा, मां यमुना और सरस्वती के मिलन स्थान संगम पर स्नान करते अपने देश के गृह मंत्री अमित शाह जी व उत्तर प्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं कुछ संत शिरोमणि

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