आई छठ दिवाली है, घर घर में खुशहाली है

 


आई छठ दिवाली है, घर घर में खुशहाली है

दूर देश से आते अपने, उजियारा फैलाने को

साथ बैठकर साथ निभाकर अपना धर्म निभाने को

ट्रेनों में है धक्का मुक्की, बाज़ारों में रौनक है

कपड़े लत्ते और मिठाई त्योहारों की ऐनक है।

बड़े बुजुर्ग और रिश्ते नाते, देते हमें बधाई है

फोड़ पटाखा दिये जलाकर सबने खुशी मनाई है।

दीवाली से छः दिन आगे छठ्ठी मइया आती हैं

बाद दीवाली घर घर में वह मंगलगीत कराती हैं।

शुरू हुई बिहार से मइया यूपी में अब आई हैं

घाट देखकर लगता है कि पूरी सृष्टि समाई है।

भागम भागी के इस आलम में रह गई यही सच्चाई है

बिन त्योहार नहीं दिखती अब, प्रेम प्यार भलाई है।

त्योहारों का संदेश यही अब, मिलजुल रहना बुद्धिमानी है

यही सनातन संस्कृति भइया यही धर्म खानदानी है।


| रचनाकार – प्रेम सागर चौबे |


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